स्मरणशक्ती कमकुवत असते म्हणतात समाजाची,म्हणून मग अश्या आठवणी करून द्याव्या लागतात.
रोहिथ मारला हे केव्हाच मागे पडलेलं आहे, आता त्याची नेमकी जात कोणती ह्यावर फक्त कागद रंगवली जाताहेत.
मागच्या वर्षी Milind Dhumale ने लिहिलेल्या लेखाच हिंदी रूपांतर केलेलं ते सगळ्यांना परत आठवण करून द्यायला हि पोस्ट.
केंद्रीय मंत्री स्मृती इराणीजीने लोकसभामे जो भाषण दिया है उससे कुछ अनाडी लोग बहुत प्रभावित हुये है ये बात सच है क्युंकी उनका जोश था हि वैसा.ऐसे किसीभी आवेशपूर्ण विवाद या झगडेमे खासकर महिलाये और निखर जाती है , इसमे उनकका अभिनय भी था ऐसा भी लोग मानते है जो लगता तो नही है.
कभी कभी हम जोश मे ऐसी बाते बोलते है जो नही बोलनी चाहिये.शब्द कमान से निकले तीर कि तरह होते है , उसकी जिम्मेदारी भी आपकीही होती है.उसके जो भी अच्छे बुरे परिणाम है उनका सामना भी करना पडता है.” हम अगर शिक्षणप्रणाली का भगवाकरण कर रहे है ये साबित हो जाये तो तो मै राजनीती छोड दुंगी “ ऐसा उन्होने जोश मे कहा तो है उस हिसाब से उन्होने जल्द से जल्द इस्तीफा देकर राजनीती छोड देनी चाहिये.
कभी कभी हम जोश मे ऐसी बाते बोलते है जो नही बोलनी चाहिये.शब्द कमान से निकले तीर कि तरह होते है , उसकी जिम्मेदारी भी आपकीही होती है.उसके जो भी अच्छे बुरे परिणाम है उनका सामना भी करना पडता है.” हम अगर शिक्षणप्रणाली का भगवाकरण कर रहे है ये साबित हो जाये तो तो मै राजनीती छोड दुंगी “ ऐसा उन्होने जोश मे कहा तो है उस हिसाब से उन्होने जल्द से जल्द इस्तीफा देकर राजनीती छोड देनी चाहिये.
पुरे पचास मिनिट कि उनके भाषण कि क्लिप दिखाई जा रही है लेकीन उन्होने ये भाषण एकसाथ पचास मिनिट नही दिया है.उनके भाषण समेत उन्हे किये सवाल और उनके जवाब मिलाकर ये क्लिप बनाकर इसे व्हायरल किया गया है ठीक उसी तरह जिस तरह जेएनयु मामले कि क्लिप व्हायरल कि गई थी.सच्चाई ये है कि कईबार सवालोसे तंग आकर ,जवाब ना दे पाने कि वजह से वो अपनी कुर्सिपर वापस बैठ गयी थी.
ऐसे भाषणमे अक्सर हमे उतना हि दिखाया जाता है जितना दिखाना “ वे “ जरुरी समझते है.शायद ये भी कारण है कि लोगोंको उनका भाषण प्रभावी लगा है. भारतीय मिडिया जिंदाबाद और गोबेल्स बाबा जिंदाबाद.
अहम बात ये है कि विपक्ष का ये आरोप है कि वे सिर्फ अपने मंत्रीमंडल के मंत्रियोके चीठ्ठीयो का जवाब देती है.किन किन लोगोंके साथ उनका पत्रव्यवहार है यही बस आजके भाषण का विषय था.रोहीथ वेम्युला मामले मे उन्होने आठ आठ खत लिखे है ,उस बारे मे सफाई देते हुये उन्होने बताया कि १-५-२०१४ से २३-२-२०१६ के बीच मे पुरे देश से उन्हे कुल ६६२३० खत मिले है जिनंमेसे ६१८९२ खतोको उन्होने जवाब भी दिया है.उन्होने पत्र भेजनेवालो कि जाती धर्म के बारे मे कभी जानकारी नही ली है. १२-२-२०१५ को इक्बाल रसूल धर नामके एक काश्मिरी मुस्लीम विद्यार्थीका फेलोशिप के बारे मे जो मुश्कील आयी थी वो उन्होने दूर कि है.
स्मृतीजी ,आपने कभी किसी कि जाती या धर्म के बारे मे पुछां नही ये सचमुच अच्छी बात है ,वैसे भी अपने देश मे नामसे पता चल हि जाता है के उसकी जाती धर्म क्या है.फिरभी आपने इतने खतो का जवाब दिया ये सराहनीय बात है और एक मंत्री के नाते आपका कर्तव्य भी है.लेकीन इन साठ हजार पत्रो मे सिर्फ एक मुस्लीम व्यक्ती का नाम मिसाल के तौर पे देने कि आपपर नौबत आती है ये भी दुर्भाग्यपूर्ण है.
स्मृतीजी ने कहा है कि उन्होने खुद एक अल्पसंख्य समुदाय कि व्यक्ती से शादी कि है, मुझसे राजनीती ना करे.याद रखनेवाली बात ये है कि उन्होने किसी मुस्लीम से नही बल्की एक पारसी व्यक्ती से शादी कि है.भारत मे अक्सर दलित और मुस्लीम समुदायपर अत्याचार होते है नाकी पारसी समुदाय पर ,पारसी समुदाय तो सायलेंट झोन मे है.इसलिये उनके इस दावे मे कोई तथ्य नही
है
.हनुमंत राव कॉंग्रेस के सांसद है जिन्होने कई चीठ्ठीया स्मृतीजी को लिखी है. जिस उपकुलगुरुकी नियुक्ती कॉंग्रेसने कि है उसी के कार्यकाल मे हैद्राबाद विश्वविद्यालय मे दलित विद्यार्थीयोकी खुद्खुशी कि घटनाए दर्ज कि गई है.इस विषय पर आप न्याय करे.ऐसे पत्र हनुमंत राव ने लिखे है.उसका एक स्मरणपत्र ९-१२-२०१४ का है और आगे का पत्रव्यवहार ४-९-१५ / ३०-९-१५ / ६-१०-१५ / २०-१०-१५ /१९-११-१५ /६-१-१६ , मतलब इस विषय मे कुल छे पत्र स्मृतीजीने भेजे है.मान लिया कि स्मृतीजीने ये पत्र भेजे है मगर उसपर क्या कारवाई हुई है उसके बारे मे कोई जानकारी उपलब्ध नही है.मतलब ये उनका सिर्फ आश्वासन है और सबसे गंभीर विषय यह है कि स्मृतीजी २०१४ से ६ जनवरी २०१६ तक हैद्राबाद युनिव्हर्सिटी मे हनुमंत राव को जवाब तो देती है और रोहित कि हत्या होती है १७ जनवरी २०१६ को.
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.हनुमंत राव कॉंग्रेस के सांसद है जिन्होने कई चीठ्ठीया स्मृतीजी को लिखी है. जिस उपकुलगुरुकी नियुक्ती कॉंग्रेसने कि है उसी के कार्यकाल मे हैद्राबाद विश्वविद्यालय मे दलित विद्यार्थीयोकी खुद्खुशी कि घटनाए दर्ज कि गई है.इस विषय पर आप न्याय करे.ऐसे पत्र हनुमंत राव ने लिखे है.उसका एक स्मरणपत्र ९-१२-२०१४ का है और आगे का पत्रव्यवहार ४-९-१५ / ३०-९-१५ / ६-१०-१५ / २०-१०-१५ /१९-११-१५ /६-१-१६ , मतलब इस विषय मे कुल छे पत्र स्मृतीजीने भेजे है.मान लिया कि स्मृतीजीने ये पत्र भेजे है मगर उसपर क्या कारवाई हुई है उसके बारे मे कोई जानकारी उपलब्ध नही है.मतलब ये उनका सिर्फ आश्वासन है और सबसे गंभीर विषय यह है कि स्मृतीजी २०१४ से ६ जनवरी २०१६ तक हैद्राबाद युनिव्हर्सिटी मे हनुमंत राव को जवाब तो देती है और रोहित कि हत्या होती है १७ जनवरी २०१६ को.
असल चिंता का विषय तो यही है , सिर्फ खत भेजे है ये केहने से या खत भेजने से मंत्रीजी कि जिम्मेदारी खतम होती है ? अगर केंद्रीय मंत्री खुद खत भेजे और फिर भी युनिव्हर्सिटी उसपर हात पर हात धरे बैठती है ? कुलगुरूके उपर कोई कारवाई क्यू नही होती है ? इसबीच स्मृतीजी श्रीमान बंडारू दत्तात्रेय से पत्रव्यवहार करती है , वो आठ खत रोहीथ और बाकी विद्यार्थियोपर कारवाई करने के लिये थी ये बात क्यू बतायी नही है ?स्मृतीजी भावनावश होकर केह्ती है कि मै भी एक मा हु , मुझे भी दुख हुआ है , रोहीथ तो बच्चा था , अगर ये सच मान ले तो फिर बंडारू दत्तात्रय के पत्रो के सहारे युनिव्हर्सिटी पर कारवाई के लिये दबाव क्यू ला रही थी ? स्मृतीजी आप संसद मे झूठ बोल रही है ? क्या आप सत्य और तथ्य उजागर नही कर रही है ?
स्मृतीजी ने कहा है के पुलिस ने तेलंगण हायकोर्ट मे जो दस्तावेज दिये है उसमे लिखा है ,” हमे शाम ७.२० मिनिट पर सूचना मिली , जब हम वहा पहुंचे तब कमरे का दरवाजा खुला था और रोहीथ कि लाश को नीचे उतारकर टेबल पर रखा गया था.उधर एक सुसाईड नोट भी थी जिसमे मौत के लिये किसीको जिम्मेदार ना ठहराने कि बात लिखी है.”
स्मृतीजी “ किसीको जिम्मेदार ना ठहराने “ कि बात पर बार बार इतना जोर क्यू दे रही है ये समझना तो मुश्कील नही.तेलंगण के एक सांसद जिनका नाम मालूम नही हो पाया है वो केहते है , “ मै और मेरे साथी वही घटनास्थल पर मौजूद थे , हमने इंटेलिजन्स ब्युरो चीफ शिवलाल रेड्डी को फोन किया और उन्हे घटना के बारे मे जानकारी दी , ब्युरो चीफ सिर्फ पंधरा मिनिट मे वहापर आगये.वहापर बहोत भीड थी और भीड गुस्से मे थी. ना वो बॉडी को हात लगाने दे रहे थे ना उसे उतारने दे रहे थे. बंडारू दत्तात्रेय को गिरफ्तार करने कि उनकी मांग थी.ये सब जानकारी देणे के लिये जब स्मृतीजी को फोन लगाया तो उन्होने फोन उठाया नही , फिर हमने सीधा प्रधानमंत्रीजी से फोन पर बात करने कि कोशिश कि “ तेलंगण के सांसद को उसी समय स्मृतीजी ने रोका और बातचीत का रुख बदल दिया.ऐसा क्यू किया गया ये तो आप जान गये होंगे.ऐसा क्यू हुवा ये आपको समझना चाहिये.
खैर , उस सांसद कि बात पर विश्वास करे तो पुलिस ने हायकोर्ट मे झुठी बात कही है , स्मृतीजी जो जानकारी संसद मे दे रही है उस बारे मे वे खुद केह्ती है कि ये उनकी जानकारी नही बल्की जो पुलिस ने बात कही है वो मै पढ रही हु.वे केह्ती है , “ पुलिस को वहा सुबह ६.३० बजेतक आने दिया नही गया , रोहीथ को मेडिकल सहायता नही मिली , ना डॉक्टर को बुलाया गया , उसको बचानेकी कोई भी कोशिश नही कि गई. उसे मृत किसने घोषित किया ? ” स्मृतीजी ये सवाल आप किससे कर रही है ?
रोहीथ कि हत्या युनिव्हर्सिटी मे एक कमेरे मे हुई , उस वक्त युनिव्हर्सिटी का प्रशासन क्या कर रहा था ? डॉक्टर क्यू बुलाया नही गया ? रेसिडेंट डॉक्टर युनिव्हर्सिटी था या नही ? इंटेलिजन्स चीफ क्या कर रहे थे ? इन सबको छात्रो को रोक पाना संभव नही था क्या ?अगर छात्र इतनी ताकद से सरकार और युनिव्हर्सिटी के खिलाफ खडे हो गये तो वो रेस्टीकेट(निकाले) कैसे गये ? अगर डॉक्टर ने मौत करार नही दी तो फिर किसने दी ? फिर उसके अंतिम संस्कार जबरन क्यू किये ? तब पुलिस के पास ऐसी कौनसी ताकद आ गयी ? रोहीथ के घरवालो को तक उसका अंतिम दर्शन करने कि अनुमती नही दी गई , उसके अंतिम संस्कार के कागजात पर अधुरी जानकारी क्यू लिखी गयी ? इतनी जल्दबाजी क्यू ? ये सारी जानकारी संसद सदन मे देनी चाहिये थी या स्मृतीजी आप हि सवाल उठा रही है ?
स्मृतीजी ने रोहीथ कि मृत्यू के मामले कि जांच हेतू एक जांच कमिटी गठीत कि थी ? क्या उसके तथ्य सामने आये है ? कि रोहीथ दलित नही था यही पता कर कमिटी चुप्पी साध बैठी है ? उसकी कोई जानकारी क्यू स्मृतीजी सदन को नही दे रही है ? क्या है जो वो छुपा रही है ? अगर कोटा नही है तो छात्र का प्रवेश गैरकानुनी है जिसको भरे सदन मे स्मृतीजीने कबुला है जिसपर कानुनी कारवाई हो सकती है.बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने मांग कि है कि नयी इन्क्वायरी कमिटी गठीत हो और उसमे एक दलित अधिकारी हो , तो स्मृतीजी उसे मान नही रहि है , क्यू ? किस बात का डर है ?बजाय उसके , “ मै अपना सर काटकर चरणो मे अर्पित करूंगी “ ऐसे फिल्मी डायलॉग क्यू फेकना पडा है ?
जोश मे वो केह तो गयी कि अगर हम शिक्षा प्रणाली का भगवाकरण कर रहे है ये साबित किया तो राजनीती त्याग दुंगी.उनकेही मंत्रीमंडल के सदस्य सांस्कृतिक मंत्री महेश शर्मा एक साक्षात्कार मे केह रहे थे कि हम पाठ्यक्रम मे रामायण /महाभारत को लाने वाले है. इंडियन एक्स्प्रेस के १०-०९-२०१५ , दिव्यमराठी ११-०९-२०१५ और लोकसत्ता ४-२-२०१६ कि खबरो के अनुसार व्यंगचित्र के माध्यम से रामायण /महाभारत आंगणवाडी स्कुलो मे पढाया जायेगा.कितने ऐसे सरकारी स्कूल है जहा धार्मिक गीत सिखाये जाते है , हिंदू त्योहार मनाये जाते है. भाजप नेता श्री सुब्रमण्यम स्वामी तो राम मंदिर निर्माण के लिये एक वर्कशॉप आयोजित कर चुके है जिसकी शुरुवात जेएनयु मे हुई थी.
ये सब भगवाकरण नही तो और क्या है ?
तो क्या स्मृती इराणी अब राजनीती त्याग देंगी ? क्या अपने पद से इस्तीफा देंगी ?
ये सब भगवाकरण नही तो और क्या है ?
तो क्या स्मृती इराणी अब राजनीती त्याग देंगी ? क्या अपने पद से इस्तीफा देंगी ?
उन्होने ये घोषणा संसद सदन मे कि है इसलिये महत्वपूर्ण है.
स्मृती इराणी का भाषण सिर्फ भावनाओ का जोश और झूठ का एक बेहतरीन नमुना कहा जा सकता है.
उनके हिसाब से कई बाते बतायी , बहोत सारी छुपायी , पुरा रुख कॉंग्रेस कि तरफ कर दिया था , और उस वक्त सदन मे ना सोनिया थी ना राहुल थे और नाही प्रधानमंत्री मौजूद थे.
स्मृती इराणी का भाषण सिर्फ भावनाओ का जोश और झूठ का एक बेहतरीन नमुना कहा जा सकता है.
उनके हिसाब से कई बाते बतायी , बहोत सारी छुपायी , पुरा रुख कॉंग्रेस कि तरफ कर दिया था , और उस वक्त सदन मे ना सोनिया थी ना राहुल थे और नाही प्रधानमंत्री मौजूद थे.
- आनंद शितोळे
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